सीमावर्ती जिलों के अन्य प्रदेशों में जोड़ने की चर्चा निकली फर्जी

सहारनपुर बिजनौर उत्तराखंड में, नोएडा गाजियाबाद बुंलदशहर दिल्ली में, मेरठ मुजफ्फरनगर शामली  बडौत बागपम हरियाणा में शामिल होगें, महज एक अफवाह। 

विरेन्द्र चौधरी पत्रकार

उत्तर प्रदेश । विगत दो दिनों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक खास खबर बकवास खबर निकली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हर नुक्कड़, नाई और पान की दुकानों और ट्रेनों में लोग चर्चा कर रहे थे कि सहारनपुर बिजनौर उत्तराखंड, मेरठ मुजफ्फरनगर बागपत बडौत शामली हरियाणा मे, गाजियाबाद नोएडा और बुंलदशहर को दिल्ली में शामिल करने की घोषणा होने वाली है।इसके पीछे कईं तरह के कारण गिनाए जा रहे थे। इस चर्चा से सरकारी कर्मचारियों में खलबली थी। वहीं कुछ लोग इसे क्षेत्रीय विकास के लिए जरूरी बता रहे थे।कुछ लोग इसे भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक महत्त्वाकाक्षां मानते हुए चौधरी अजीज सिंह, मायावती और मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक कैरियर को खत्म करने और एक तरफा भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व कायम करने की राजनीतिक साजिश बता रहे थे।

इस चर्चा में खास बात यह थी कि जो इन जिलों के बंटवारे के मुख्य बिन्दु चर्चा में थे, उन बिन्दुओं के आस-पास पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति घूमती रही है। मसलन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बैंच की स्थापना, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आमदनी को पूर्वो उत्तर प्रदेश में खर्च करना, राजनीति में पूर्वी उत्तर प्रदेश का वर्चस्व कायम रहना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय लोकदल, बसपा और सपा के मुस्लिम वोट को अलग-अलग प्रदेशों में बांटकर भाजपा को मजबूत करना। वर्तमान में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा की सरकार है। इन जिलों को अन्य जिलों में शामिल करने का सबसे अच्छा अवसर है। विपक्ष लगभग खत्म है, एक मौर्चे पर आने की संभावनाएं भी कम है।इसलिए यह राजनीतिक चर्चा तेजी से फैलती चली गयी।

जब इस चर्चा की तह में गये तो पता चला कि हाल ही में पिछले दिनों उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री बिजनौर जिले के नजीबाबाद टाउन में एक कार्यक्रम में शामिल होने आये थे। वहीं उनकी मुलाकात को लेकर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने आरोप जड़ दिया कि दोनों मंत्रियों के बीच इन जिलों को लेकर वार्ता हुई है। इस अफवाह की जोरदार चर्चा फैलने पर उत्तराखंड सरकार के सरकारी प्रवक्ता मदन कौशिक ने इस खास खबर को सिरे से खारिज करते हुए सपष्ट कर दिया कि दोनो मंत्रियों के बीच इन जिलों को लेकर कोई वार्ता नहीं हुई । उन्होंने आगे भी इस विषय पर किसी तरह की वार्ता होने को नकारते हुए सोशल मीडिया में आयी खबरों पर विराम लगा दिया। लेकिन यह भी सत्य है बिना आग के धुआं नही उठता और राजनीति में सब कुछ संभव है।

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