वंचित समाज, लोकत्रंत्र की स्थापना, असली आजा़दी की लडांई लड़ने के लिए राजनीति में आया हुं : के के शर्मा

विचार और खिलाडी़ कभी बूढा नही होता-मै विचार भी खिलाडी़ भी

बहता पानी कभी थकता नही, मै कैसे थक जाऊं।मेरा जीवन सामूहिक सपने पूरे करने के लिए-इसीलिए निंरन्तर काम पर बने रहना मेरा कर्तव्य है-आम आदमी के लिए, समाज के लिए और असली आजा़दी के लिए

नयी दिल्ली। आज 28 फरवरी को अमेठी से रिटायर्ड हुए जज के के शर्मा ने रात्री के 1बजे आजा़द भारत कांग्रेस के मुख्यालय दिल्ली पहुंच कर आजा़द भारत कांग्रेस की कमान संभाल ली। समाज और राष्ट्र के प्रति अपने विचार और कर्तव्यों को लेकर वो जनता के बीच आने की शुरूआत कर चुके है। एक दिन भी आराम नही। इसे ही कहते है निरन्तर बहते रहना कभी ना थकना। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालते ही उन्होंने दा दिल्ली डाॅन के सम्पादक से कहा दोस्त, विचार और खिलाडी़ ना कभी थकते है ना कभी मरते।उन्होने कहा के के शर्मा कोई नाम नही है , के के एक खिलाडी़ है एक विचार है।

आजा़द भारत कांग्रेस की कमान संभालते हुए कहा कि अब मेरा एक ही काम है एक ही सपना। आखिरी आदमी को न्याय मिलें हर आदमी को रोटी और छत, जो उसके जैविक अधिकार है। उन्होंने कहा कि सरकार एक पिता की भूमिका में होती है उसके लिए सब बराबर होते है।यें ही बताने और सिखाने आया हुं। और ये भी बता दूं कि सबके हको के लिए हर स्तर से संघर्ष करूगां।

के के शर्मा ने कहा मैं रहूं या ना रहुं  देश के युवाओं को संघर्ष के लिए जिंदा कर जाऊगां। युवाओं में सामूहिक विचारधारा और सामूहिक संघर्ष का जज्बा पैदा करूगां। बस एक संदेश देना चाहुंगा-“मैं रहुं या ना रहुं फिर भी मैं जिंदा रहुगां।

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