इच्छा मृत्यु ग्रंथों और कुरान के खिलाफ

सुप्रीम कोर्ट के इच्छा मृत्यु फैसले को देवबन्दी उलेमा ओर हिंदू धर्म गुरुओं ने नकारा

सहारनपुर।  सुप्रीम  कोर्ट ने भले ही विभिन्न शर्तो के आधार पर इच्छा मृत्यु  की इजाजत देने का फैसला सूना दिया हो लेकिन हिन्दू – मुस्लिम धर्म गुरु सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को न सिर्फ सिरे से खारिज कर रहे हैं बल्कि इच्छा मृत्यु को कुरान और ग्रंथो के खिलाफ बता रहे हैं। एक ओर देवबंदी उलेमा इच्छा मृत्यु को इस्लाम में हराम और शरीयत में नाजायज करार दे रहे है वहीं हिन्दू धर्म गुरु इच्छा मृत्यु को शास्त्रों के मुताबिक़ आत्महत्या की श्रेणी में आता है और जन्म मरण ईश्वर के अधीन है।
आपको बता दें कि शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की के मामले में फैसला सुनाया था कि अगर कोई शख्स मरने की स्तिथि में है या फिर किसी लाइलाज बिमारी का शिकार है तो उसे विभिन्न शर्तो पर इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जा सकती है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व में पांच वरिष्ठ जजों की सविधान पीठ ने यह फैसला लिया है। लेकिन देवबंदी हिन्दू – मुस्लिम धर्म गुरुओ ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर नाराजगी जताई है। एक ओर जहां हिन्दू धर्म गुरु इच्छा मृत्यु को शास्त्रों और ग्रंथो के खिलाफ बता रहे हैं वहीँ देवबंदी उलेमा इच्छा मृत्यु को इस्लाम में हराम और शरीयत ने नाजायज बता रहे हैं। देवबंदी उलेमा मुफ़्ती अथर कासमी ने कहा कि इस्लाम इच्छा मृत्यु करना खुदखुशी के बराबर है। इतना ही नहीं बीमारियों और अन्य कारणों से अल्लाह से मरने की दुआ करना भी शरीयत और इस्लाम के खिलाफ है। इस्लाम इसकी कतई इजाजत नहीं देता। उधर हिन्दू धर्म गुरु पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा कि जहां तक इच्छा मृत्यु का सवाल है शास्त्रों ने अनुसार जीवन – मरण यानी पैदा करना ईश्वर के अधीन है और मृत्त्यु भी ईश्वर के ही अधीन है। इच्छा मृत्यु करना आत्मह्त्या की श्रेणी में आता है। इसलिए शास्त्रों के अनुसार इच्छा मृत्यु उचित नहीं है।

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