दोआबखंड निर्माण को लेकर ली शपथ,राजनीति नही अब रण होगा

विरेन्द्र चौधरी 
मोदीपुरम् । पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास में होते आ रहे अन्याय-शोषण,भाषा व भौगोलिक आधार को ध्यान में रखते हुए अलग प्रदेश निर्माण जरूरी-को लेकर क्षेत्रीय चिंतको, बुद्धिजीवियों, प्रबुद्ध नागरिकों, समाजसेवियों व समीक्षकों की एक बैठक आहूत की गई थी।बैठक में सर्वप्रथम प्रथक प्रदेश का “दोआब खंड” नामकरण किया गया।दोआब खंड निर्माण के लिए केंद्रीय कमेटी का गठन किया गया।जिसकी अध्यक्षता किसान नेता चौधरी जगबीर सांगवान व संचालन संजीव चिकारा ने किया।मुख्य अतिथि के रूप में डा०आमिर हसन ने शिरकत की।
इस अवसर पर नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष दोआब खंड निर्माण संगठन लोकेन्द्र सिंह ने कहा कि 72% टैक्स देने वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक और विकास में पिछड़ा हुआ है।2 से 3 करोड़ जनसंख्या वाले उत्तराखंड, झारखंड, हरियाणा, पंजाब व तेलगांना जैसे राज्य अपने निर्माण के बाद पूरी तरह विकसित हुए है।जनसंख्या के आधार पर हमारा उत्तर प्रदेश एक पूरा देश है।इसके बंटवारे को लेकर हम पूर्वांचल के राजनीतिक दलों की साजिश का शिकार है।दोआब खंड निर्माण संगठन राजनीतिक दलों की साजिश को नाकाम कर दोआब खंड के निर्माण तक लडाई लड़ेगा।
बाहैसियत नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दोआब खंड निर्माण संगठन डा० आमिर हसन ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश कृषि और उधोग क्षेत्र है।जो प्रदेश और देश के विकास में सर्वाधिक योगदान करता है।उन्होंने कहा कि पश्चिम अपने हको की मांग ना शुरू कर दे,इसलिए राजनीति हमें जातियों और सम्प्रदायों में बांटकर हमारी कमाई, संपदा और धन का इस्तेमाल कर अपना विकास करते है।यह एक विचारणीय प्रश्न है?अब यहां का हिंदू और मुसलमान जागने लगा है।वो अब आपसी सौहार्द और संघर्ष से दोआब खंड का निर्माण कर गंगा जमुना तहजीब की मिसाल कायम करने को आतुर है।

नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दोआब खंड निर्माण संगठन संजीव चिकारा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाषा और भूगोल के हिसाब से पूर्वी उत्तर प्रदेश से कहीं भी मेल नही खाता।उत्तर प्रदेश के इस बे-मेल के कारण ही पूर्वांचल और प्रथक बुंदेलखंड की मांग उठ रही है।पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग राज्य की मांग चौधरी चरणसिंह जी के समय से उठ रही है।लेकिन कमाई के संसाधनों के दोहन के कारण हम राजनीतिक कुचक्र के शिकार है। चिकारा ने कहा अब कोई राजनीतिक षड्यंत्र दोआब खंड के निर्माण को रोक नही सकेगा।दोआब खंड अब हमारी अस्मिता का प्रश्न बन गया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश अपनी उपजाऊ भूमि और औधोगिक क्षमता के कारण समपन्न होने के बावजूद विकास के नाम पर राजनीतिक उपेक्षा का शिकार है।जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इसीलिए अब सामाजिक, भाषा और भौगोलिक आधार पर अलग प्रदेश का निर्माण आज की आवश्यकता है

दोआब खंड निर्माण संगठन के नवनियुक्त राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रमोद तोमर ने कहा कि दोआब खंड के वजूद में आने के बाद काम के लिए 550किमी लखनऊ और न्याय पाने के लिए 850 किमी प्रयागराज नही जाना पडेगा।सब कुछ 120 से 150 किमी के दायरे में आ जायेगा।जिससे हमारा समय,धन और उर्जा की बचत होगी।हमारी आने वाली पीढ़ियों को रोजगार मिलेगा। सर्व समाज विकसित होगा। तोमर ने कहा कि 15 वर्षों के भीतर ही हम दुनिया के सबसे विकसित प्रदेशों में पहले पायदान पर होगें।उन्होंने कहा दोआब खंड का निर्माण आने वाली पीढ़ियों के लिए एक वरदान होगा। इसलिए हम अब और शोषण सहने को तैयार नहीं है।
दोआब खंड निर्माण संगठन के सचिव राजीव उज्जवल व के पी सांगवान ने सयुंक्त बयान में कहा कि जहां-जहां छोटे राज्य है,वहां तरक्की नज़र आती है।वहां कहीं भी जातीय व साम्प्रदायिक दंगे नही है,क्योंकि वहां की विकास दर ऊंची है। वहां समाज समपन्न और शिक्षित होते जा रहे है। उन्होंने कहा दोआब खंड के निर्माण के बाद इसकी जनसंख्या 5 करोड़ के लगभग रह जायेगी।72% टैक्स देने वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश अपने पैसे से विकास की बुलंदियों पर होगा।उन्होंने बल देते हुए कहा कि दोआब खंड आंदोलन को घर-घर तक पहुंचाना होगा।ताकि आंदोलन निर्णायक हो।
दोआब खंड के नवनियुक्त राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष विरेन्द्र चौधरी ने कहा कि कोष परिवार, समाज,प्रदेश और राष्ट्र की रीढ की हड्डी है।दोआब खंड के साथ ऐसा कुचक्र हो रहा है कि कोष दोआब खंड का,लूट पूर्वी उत्तर प्रदेश की।अब ये नही चलेगा। विरेन्द्र चौधरी ने कहा अब जनमत पूर्वी उत्तर प्रदेश की राजनीति के खिलाफ़ खड़ी हो गया है।उन्होंने कहा कि हम 15 जिलों को दोआब खंड मान चुके है,यूं समझिये सरकारी घोषणा होनी बाकि है।इसी मानसिकता को लेकर हमें आंदोलन की तैयारी करनी है।
मीडिया प्रभारी राजेश शर्मा ने कहा कि आंदोलन की जम़ीनी लडाई के साथ-साथ हमें मीडिया के सहयोग की भी आवश्यकता है, अगर मीडिया इस लडाई में शामिल हो गया तो हम आधी लडाई जीत लेगें।
अंत में दोआब खंड निर्माण संगठन के संरक्षक चौधरी जगबीर सिंह ने कहा कि किसी भी जंग को जीतने के लिए आपसी विश्वास, मजबूत संगठन, इच्छा शक्ति, समर्पण और त्याग व तालमेल के साथ-साथ आंतरिक अनुशासन की आवश्यकता होती है। मैं इस संगठन में उसे महसूस कर रहा हुं। अब दोआब खंड का निर्माण निश्चित हो गया है।उन्होंने निर्देश दिया कि आगामी बैठक में वे सबके कामों की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा आंदोलन में अभ्रद भाषा के उपयोग से बचे।संगठन में अनुशासनहिनता बर्दाश्त नही की जायेगी। अंत में उन्होंने बैठक में आये सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और आंदोलन की वफादारी की शपथ दिलाई।
प्रदेश अध्यक्ष विनोद करनावल ने कहा कि दोआब खंड आंदोलन शुरू हो चुका है।राजनीति हमारे आंदोलन को कमजोर करने के लिए जातीय,सम्प्रदायों और वर्गों में बांटने का काम करेगी, हमें उसे नाकाम करना है।इसके लिए जरूरी है सभी पदाधिकारियों और आंदोलनकारियों में एक दूसरे के प्रति सम्मान और निष्ठा।उन्होंने कहा कि वे आज से ही दोआब खंड आंदोलन को तेज करेंगे। बैठक में दर्जनों लोगों ने भाग लेते हुए दोआब खंड आंदोलन के लिए शपथ ली।

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